
[ब्यूरो डेस्क | बभनान/छपिया/ढढौवा]
पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की लपटें अब सात समंदर पार कर हमारे बभनान और छपिया क्षेत्र की दहलीज तक पहुँच गई हैं, जिससे समूचे इलाके में तेल का गंभीर संकट गहरा गया है। वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की सप्लाई चेन टूटने का सीधा असर स्थानीय पेट्रोल पंपों पर दिख रहा है, जहाँ सुबह से ही ट्रैक्टरों और दोपहिया वाहनों की किलोमीटर लंबी कतारें लगी हुई हैं। स्थिति इतनी विकट है कि क्षेत्र के कई प्रमुख पंपों पर ‘तेल समाप्त’ के बोर्ड लटक गए हैं, जिससे किसानों और आम जनता में भारी चिंता व्याप्त है।
संकट ढढौवा और आसपास के ग्रामीण अंचलों के लिए किसी बड़ी मुसीबत से कम नहीं है। डीजल की किल्लत और बढ़ती कीमतों के कारण खेती की लागत बढ़ने और सिंचाई व्यवस्था ठप होने का डर सता रहा है। गौरतलब है कि हमारे पड़ोसी देशों जैसे पाकिस्तान, बांग्लादेश और श्रीलंका में स्थिति इतनी बदतर हो चुकी है कि वहां स्कूल-कॉलेज बंद कर ऊर्जा आपातकाल घोषित कर दिया गया है। भूटान जैसे देशों में जेरिकैन में तेल बेचने पर रोक लगा दी गई है, और वही मंजर अब हमारे स्थानीय बाजारों में पैनिक बाइंग (जरूरत से ज्यादा खरीदारी) के रूप में दिख रहा है।
इस वैश्विक आपदा के समय में धैर्य रखना अनिवार्य है। अफवाहों से बचें और ईंधन व बिजली की हर संभव बचत करें। आज की आपकी थोड़ी सी बचत ही हमारे क्षेत्र की अर्थव्यवस्था और कृषि को सुरक्षित रख पाएगी।
