ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर सरकार का नया पक्ष, हाईकोर्ट में रखेगी संशोधित कानून का हवाला।

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लखनऊ/प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में ग्राम प्रधानों को प्रशासक नियुक्त किए जाने के मामले में राज्य सरकार अब इलाहाबाद हाईकोर्ट में अपना पक्ष संशोधित कानून के आधार पर रखेगी। सरकार का कहना है कि यह नियुक्तियां वर्ष 2000 के निरस्त अध्यादेश के तहत नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम, 1947 में किए गए संशोधन के तहत की गई हैं।

इससे पहले हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 25 जून को टिप्पणी की थी कि असंवैधानिक हो चुके प्रावधानों के आधार पर ग्राम प्रधानों को प्रशासक नहीं बनाया जा सकता और सरकार को पंचायत चुनाव की अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया था।

अब पंचायतीराज विभाग ने न्याय विभाग से कानूनी परामर्श लेने के बाद निर्णय लिया है कि सरकार संशोधित अधिनियम के प्रावधानों का हवाला देते हुए हाईकोर्ट की खंडपीठ के समक्ष अपना पक्ष रखेगी। सरकार का दावा है कि संशोधित कानून को अब तक किसी अदालत ने असंवैधानिक घोषित नहीं किया है।

उधर, ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के खिलाफ दायर जनहित याचिका पर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से जवाब भी तलब किया है। मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त को प्रस्तावित है।

नोट: यह जानकारी प्रकाशित समाचार के आधार पर है। मामले में अंतिम निर्णय न्यायालय द्वारा सुनवाई के बाद ही होगा।

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