ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने पर हाईकोर्ट की रोक, यूपी सरकार को बड़ा झटका

प्रयागराज/लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायतों के कार्यकाल समाप्त होने के बाद ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने के राज्य सरकार के आदेश पर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने अंतरिम रोक लगा दी है। अदालत के इस आदेश के बाद सरकार का निर्णय फिलहाल प्रभावी नहीं रहेगा।
हाईकोर्ट ने मामले की सुनवाई के दौरान राज्य सरकार से अपना पक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। अंतिम निर्णय आने तक ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने की प्रक्रिया पर रोक रहेगी। अदालत के इस कदम को प्रदेश की पंचायत व्यवस्था और आगामी पंचायत चुनावों के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि ग्राम पंचायतों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक नियुक्त करना संविधान और पंचायत राज अधिनियम की भावना के अनुरूप नहीं है। वहीं, राज्य सरकार अपने निर्णय का कानूनी आधार अदालत के समक्ष रखेगी।
क्या होगा असर?
✍️ग्राम प्रधानों को प्रशासक बनाने की प्रक्रिया फिलहाल रुकेगी।
✍️सरकार को हाईकोर्ट में अपना विस्तृत जवाब दाखिल करना होगा।
✍️अगली सुनवाई के बाद अदालत आगे की दिशा तय करेगी।
✍️पंचायत चुनाव की समय-सीमा को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ सकता है।
इस मामले पर प्रदेश भर के लाखों ग्राम प्रधानों, पंचायत प्रतिनिधियों और ग्रामीणों की निगाहें टिकी हैं, क्योंकि हाईकोर्ट का अंतिम फैसला पंचायत व्यवस्था की आगामी दिशा तय करेगा।
— ग्रामोदय टाइम्स
